Sunday, October 9, 2016

एक नव ब्राह्मण की बेचैनी !

 
पता रहना चाहिए मुझे तुम्हारी जाति,
नहीं तो तुम्हारी पॉलिटिक्स पता नहीं चलती!
होने लगता हूँ मैं बैचैन! निहायत ही बैचैन! 
जब नहीं पता लगा पाता मैं तुम्हारे नाम से तुम्हारी जाति का पता !I
बस अपने जैसे जानवरों के समूह में ही मैं खुश हूँ 
क्योंकि यही सीखा है मैंने "उन" जानवरों से जोकि जन्मना सदियों तक सम्मानीय रहे !
रौंद डाला था जिन्होंने करोड़ों लोगों का सम्मान!
मैं अब बिलकुल उनके जैसा हूँ, बस देखता हूँ कि मैं और मेरा कबीला खुश रहे!
मिलती रहे मेरे हाथी को हरी घास!
और रहें मेरे अपने ही मेरे आस पास!
क्योंकि मैंने मान लिया है (जैसा कि उन्होंने माना था) कि
जन्म कुल ही सफलता कि कुंजी है मेरे भारत महान में!
इसीलिए ऐ दोस्त ! मुझ नव ब्राह्मण पर तरस खाओ ! और प्लीज 
अपने नाम से अपनी जाति कि प्रतीति अवश्य कराओ !

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